उत्तर प्रदेश: अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी को लेकर देश की राजनीति गरमा गई है। अब इस मामले में प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के हस्तक्षेप की खबर सामने आने के बाद विवाद और भी गहरा गया है। सूत्रों के मुताबिक, पीएमओ ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से पूरे मामले पर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
विवाद की शुरुआत तब हुई जब समाजवादी पार्टी के नेता और पूर्व मंत्री पवन पांडेय ने दावा किया कि राम मंदिर के चढ़ावे में 5 से 7 करोड़ रुपये तक की हेराफेरी हुई है। इसके बाद सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी मामले को उठाते हुए सरकार और ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए। उन्होंने पूछा कि यदि कोई गड़बड़ी नहीं हुई है तो सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक करने में क्या परेशानी है।

इसी बीच भाजपा नेता डॉ. रजनीश सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। उन्होंने सुझाव दिया कि सीबीआई और ईडी जैसी स्वतंत्र एजेंसियों से जांच कराई जाए ताकि सच्चाई सामने आ सके और करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था बनी रहे।
हालांकि, राम मंदिर ट्रस्ट ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का कहना है कि मंदिर में आने वाले दान की नियमित ऑडिट प्रक्रिया होती है। चढ़ावे की गिनती बैंक अधिकारियों और ट्रस्ट प्रतिनिधियों की मौजूदगी में सीसीटीवी निगरानी के तहत की जाती है। अभी तक किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता सामने नहीं आई है।
गौरतलब है कि दिसंबर 2025 तक ट्रस्ट को 4,575 करोड़ रुपये से अधिक का दान प्राप्त हो चुका है, जिसमें से लगभग 2,475 करोड़ रुपये मंदिर निर्माण और अन्य परियोजनाओं पर खर्च किए गए हैं।
अब देशभर की निगाहें पीएमओ द्वारा मांगी गई रिपोर्ट पर टिकी हैं। आने वाले दिनों में यह साफ हो जाएगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और क्या इस मामले में किसी बड़ी जांच की जरूरत पड़ेगी।
